Sunday, February 12, 2017

कलम से वार्ता

पूछती है कलम , आज लिखाई में इतना गम क्यों है
मुस्काता चेहरा तो ठीक, पर पलके नाम क्यों है 
अरे हाथों में कम्पन , हृदय में तीव्र स्पंदन कैसा है
बीते वर्षो में क्या फिर कोई मिला उस जैसा है
(कलम को जवाब देते हुए )
तेरा क्या है , तू तो  हर रोज़ श्याही बदलता है
पर मेरा मन तो अब तक उस रुसवाई से डरता है
ये शक्ल तो अक्सर दुनिया को भ्रमती  है
पर आँखे तो अब तक केवल उसका ही पानी भरती है