Saturday, September 15, 2012


सोचा था होगा नया देश
होंगे नए चेहरे 
उपलब्धियों के  बल पर बुनेगे सपने सुनहरे
सोचा था जीवन को नया उद्देश्य मिलेगा 
शेष हृदय को कोई विशेष मिलेगा
बने है नए मित्र 
हो रही है  नयी बातें 
फिर भी सूने है दिन 
और जागी हुई है रातें  
अब तक हर आवाज़ में रहती है उस आवाज़ की तलाश 
बाकी है हर चेहरे में उसकी एक झलक की आस 
श्वेत-अश्वेत चर्म से निर्मोही हो चुकी है मेरी भावना 
तुच्छ शरीर की नहीं 
अब तो है उस आत्मा की कामना
कदाचित  ही पूर्ण हो इस जन्म में मेरी यह वासना 
अतः करता हूँ उस शाश्वत से अंत की याचना ||

Monday, September 3, 2012

चेहरे में चेहरा था वो अजनबी 
रातों को दिखता था जो चाँद कभी-कभी |
अब वो चेहरा मेरे होठों के पास हैं 
जिसे चूमना मेरा बरसों का ख्याब हैं |
पर क्या करूँ मैं उसे शर्म सी आती हैं 
चाँद पर दाग न लग जाये इस बात से घबराती हैं |
अब कैसे समझाऊँ  मैं उसे इस चुम्बन पर मेरा अधिकार हैं 
हवस नहीं हैं जानम ये तो बरसो का प्यार हैं ||