अक्सर भूल जाता हूँ कि त्यौहार क्या होता है
मौकों पर मिलने वाला उपहार क्या होता है |
फोन की घंटी भी बड़ा टन टना रही है |
व्हाट्सप्प पर संदेसो की कुछ बाढ़ सी आयी है
भीनी ही सही, पर यादो में कुछ मिठास सी आयी है |
शायद मिठास ये कुछ डोनट वाली है
खील-बताशे के बिना ही मन रही ये दिवाली है ||