Wednesday, December 21, 2011

ek asaha

तन्हा हूँ मैं , फिर भी मुस्कुरा रहा हूँ
बुझी गयी उस शमा को फिर से जला रहा हूँ
दर्द दिया था जिस रिश्ते ने
फिर से उसे पाने कि मंशा है
क्या होगा वो उतना ही मीठा ,इस पर मुझे संशय है
पर क्या करे इस ह्रदय का ,जो मृगतृष्णा में लिप्त है
झरने है बहुत, पर वो तो उन स्मृतियों से संतृप्त है
है कोई ऐसी शक्ति , जो उन स्मृतियों को जीवंत कर दे
और इस तन्हाई के रिश्ते का सदा के लिए अंत कर दे ||

Friday, July 15, 2011

दिल के हर कोने से इक आवाज़ आई है
खुद खुदा ने भी जिसपे मुहर लगाई है
उस आवाज़ में बस तेरा ही नाम गूंजता है
सदा आये ये दिन,ऐसा कुछ पैगाम गूंजता है ||

इक ख्याइश थी उनसे गुफ्तगु कर लूँ
दोस्ती की नयी कहानी शुरू कर लूँ |
पर उसने तो कुछ इस कदर बेगाना कर दिया है
जैसे शायर की मुराद को बेमाना कर दिया है ||

Thursday, June 16, 2011

क्या है जिंदगी ,बस दो पन्नो की कहानी
एक पन्ने में तू ,दूजे में कोई सूरत अनजानी
उस तरफ थी खुशियाँ ,इस तरफ छाई है हैरानी
कंधे है बहुत ,पर नहीं कोई उन हाथों का सानी
जिनके बल पर ,हमने की थी किस्मत से मनमानी
यारो कोई तो बता दो , हो गयी हमसे ऐसी क्या नादानी
जो हाथ तो छोड़ चुके थे पहले,पर अब तो तुमने कर दी यादें पुरानी

Sunday, April 17, 2011

ख्याब

हर रात सोचता हूँ
कब उस रात की सुबह होगी
आँखों में बसे है जो स्वप्न ,उनकी फतह होगी |
फिर भी हर रात ख्यालों में कट जाती है
और सुबह होते ही एक धूमिल सी छवि याद आती है |
अरे अब तो धीरे-धीरे उस छवि से धुल भी हटने लगी है
फिर से दिल में एक प्यार की कलि खिलने लगी है |
कैसे समझाउं इस दिल को ,हर स्वप्न सत्य नहीं होता
किसी दूरदर्शी से चाँद पर अधिपत्य नहीं होता ||

Monday, April 11, 2011

anmol 4 saal

atteet k aaine me jab dekhta hu
chaar saal ko chand dino me bette dekhta hun
yaad hai vo pahli class MTH 101 ki
dil me tha ek ajeeb sa darr,aankhon me thi parchai sunahre jeevan ki
par dheere-2 IIT me aakar aisi aadat ho gayi
aankhein doobi neend me ,Proff ki har baat lori ban gayi
kisi tarah First year beeta aur shuru hui chemical engg. ki padai
do baar pada Flumech,fir bhi NS equation ab tak samjh na aayi
fir to jaise dept. courses ki jhari lag gayi
Ist year ki saari neend kuch pal me hi khul gayi
itne par to 3rd year me dept. courses se ho gaya pyaar
aur Btech se dual me change ko dil ho gaya tayaar

par socha na tha ek vakt aisa bhi aayega
chaar saal beete jinke saath ab unki vidai se dil bhar aayega
honge ankhon me aasun aur dil me yaaro k navjeebvan k liy badahi
bas yaad rahenge ye chaar saal jisne poori zindagi banayi ....

Sunday, March 13, 2011

रह रह कर अब दिल में एक टीस उठने लगी है
बीतें दिनों के साथ को इतिहास के आईने में ढूदने लगी है |
पर ये क्या हुआ जो आँखों में अब एक नहीं दो छवियाँ धुन्दली पाता हूँ
गुजरे कल और वर्तमान को लड़ते पाता हूँ
कौन सी है यह दूसरी तरंग जो पहले से अध्यारोपण कर रही है
और भूतकाल की छवि को धूमिल कर रही है
शायद यही है वो जो इस दर्द को चूर करेगी
और दिल में उठी इस टीस को अपने प्यार से काफूर करेगी ||

Sunday, February 27, 2011

Kuch haseen yaadien

१२ जून सन २००९ हमेशा की तरह रात को ११:३० बजे मैं library से वापस आया और सबसे पहले आते ही "डब्बा " खोला और Gtalk के खुलते ही मेरी नजरे किसी को ढूँढने लगी ...पर आज वो online नहीं आई थी .......हैरान परेशान मैंने अपना mobile और emails देखे कि कहीं कोई संदेसा तो नहीं छोडा हैं उसने .....पर उसका कोई mail नहीं आया था.
पिछले दो महीने में ऐसा कोई दिन नहीं गया जब हमने बात न कि हो .....पर आज न तो उसका मोबाइल लग रहा था और न ही वो online थी ........आज भी याद हैं मुझे १२ अप्रैल सन २००९ शाम के कुछ सात बजे होंगे अचानक से Gtalk पर Buzz होता हैं
tani ji:thr?
me:hmmm
tani ji: aacha
(status mesaage) DND
me: aapne status msg to DND lagay hain aur mujhse baat kar rahi ho
tani ji: mere pass kuch aur bhi hain aapke liye .....1 min
me:k
tani ji :tujhme rab dikhta hian yaara main karu

यह सब पढ़कर तो जैसे मेरे हाथ कापने लगे मैं अचानक से स्तब्ध हो गया
फिर से buzz हुआ
tani ji:r u thr?
मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था मैं क्या कहूं .......शायद यह था उसके प्यार का इकरार .यह जवाब था मेरे उस प्रेम प्रस्ताव का जो मैंने उससे १० दिन पहले दिया था
मुझे तो विशवास ही नहीं हो रहा था कि उसने मेरा प्यार स्वीकार कर लिया हैं ..........यह थी एक iitian के प्यार की शुरुवात
तभी सहसा रात को Gtalk पर किसी का ping सुनाई दिया ज्यूँ ही मैंने पलट के देखा
tani ji: jaan thr ?

Sunday, February 20, 2011

आपके चेहरे ने देखने को मजबूर किया है
बातों ने आपकी सुनने को जरूर किया है
पर कैसी अदा है आपकी जो मजबूर भी रहने नहीं देती
चेहरा तो दिखा जाती हो स्वप्न में पर आवाज़ तो बिन मोबाइल के सुनाई नहीं देती||
दिल के आंसुओ की श्याही से पैगाम लिखता हूँ
और पैगाम में सिर्फ आपका नाम लिखता हूँ
याद किया करती थी जो हार रात मुझे
अब उनकी इस बेरुखी को सरेआम लिखता हूँ ||
मचलती आँखों को खोज थी जिस चेहरे की
सूने कानो ने खायिश की थी जिसकी
मिल गयी है वो खुदा का करम है
फिर मिल कर भी मिलने में उन्हें क्यूँ आती शर्म हैं ||
थामना चाहता हूँ उनका हाथ सारी ज़िन्दगी के लिए
चाहता हूँ उनका चेहरा बन्दिगी के लिए
पर वो है जो इजहारे इश्क से शर्माती है
हम तो है गुलाम उनके फिर भी क्यूँ वो हुक्म देने से घबराती हैं ||

हर लव्ज लिखने से पहले नाम आपका आता है
हर दुआ से पहले ख्याल आपका आता है
फिर भी आपको पाने की मशक्कत की इन्तह नहीं है
क्यूंकि आपके सिवा मेरे दिल में किसी और क लिए पनाह नहीं है ||