क्या हैं कविता
कवि के होठों कि इक बात हैं |
कभी लाती ख़ुशी और कभी गम कि बरसात हैं |
कविता की इक बात निराली हैं
न जाने कितने मतलब हैं इसके
ये बात खुद कवि ने भी न जानी हैं |
ज्यों बारिश की बूंदों से बुझती मिटटी की प्यास हैं
कविता के भावों से निकलती मन की भाड़ास हैं |
कागज़ पर केवल शब्दों का कोष नहीं हैं कविता
यह तो नीले आसमान में उडती पूंछियों की आवाज़ हैं |
कभी वीर रस और कभी शांत रस का सार हैं कविता
तो कभी मानवीय मूल्यों की बहती बहार हैं |
कभी प्रेमी के मुख की बात हैं कविता
तो कभी देश में भड़काती आग हैं |
क्या हैं कविता
कवि के होठों की इक बात हैं ||
very nice shayam.. i was unaware that u right soo deep nd soo well.. gr8 work... keep it up :)
ReplyDeleteits shyam...not shayam.....
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