Sunday, February 20, 2011

दिल के आंसुओ की श्याही से पैगाम लिखता हूँ
और पैगाम में सिर्फ आपका नाम लिखता हूँ
याद किया करती थी जो हार रात मुझे
अब उनकी इस बेरुखी को सरेआम लिखता हूँ ||

1 comment:

  1. "अब उनकी इस बेरुखी को सरेआम लिखता हूँ"

    शुभकामनाएं

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