हजारो मील अपने वतन से दूर हूँ
पर फिर भी दर्द होता है मुझे
बढ़ गए है बलात्कार
बढ गयी है जात्तियाँ
उठे अगर आवाज़ तो मिलते है watercanon
और पड़ती है लाठियां
कैसा है ये न्याय
कैसी है ये व्यवस्थाये
आदमी कर रहा है शोषण
औरते सह रही है यातनायें
चिल्लाते है सब नेता
पर फिर भी सख्त कानून नहीं बनाता
कल कोई नेता न फस जाये इस बात से है घभराता
अब मैं दोष क्या दू इस संसद को
सारा समाज ही है दूषित
अब पौरुषत्व के इस नंगेपन से आने लगी है घिन
जहाँ 3 वर्ष की बच्ची नहीं है उस प्रताड़ित युवती से भिन्न
यदि ऐसा ही भारत और इसके संस्कार
तो नहीं चहिहे ये देश
नहीं चहिहे इसकी मिटटी
सात समुन्दर पार ही अब
बनाऊंगा दोष मुक्त समाज और सुरक्षित सृष्टि
पर फिर भी दर्द होता है मुझे
बढ़ गए है बलात्कार
बढ गयी है जात्तियाँ
उठे अगर आवाज़ तो मिलते है watercanon
और पड़ती है लाठियां
कैसा है ये न्याय
कैसी है ये व्यवस्थाये
आदमी कर रहा है शोषण
औरते सह रही है यातनायें
चिल्लाते है सब नेता
पर फिर भी सख्त कानून नहीं बनाता
कल कोई नेता न फस जाये इस बात से है घभराता
अब मैं दोष क्या दू इस संसद को
सारा समाज ही है दूषित
अब पौरुषत्व के इस नंगेपन से आने लगी है घिन
जहाँ 3 वर्ष की बच्ची नहीं है उस प्रताड़ित युवती से भिन्न
यदि ऐसा ही भारत और इसके संस्कार
तो नहीं चहिहे ये देश
नहीं चहिहे इसकी मिटटी
सात समुन्दर पार ही अब
बनाऊंगा दोष मुक्त समाज और सुरक्षित सृष्टि
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