Sunday, February 10, 2013

अब भी तलाश कुछ बाकी है ।

गालों के गड्ढो में मुस्कान की
नीली आँखों में छुपे अनजान की
ढेरों मुलाकातों में केवल उस एक बात की
और उसके अंतर मन में घुले उन जस्बात की
अब भी तलाश कुछ बाकी है ।

सूनी रातों के बदले केवल एक शाम की
टूटे दिल को आराम की
सोती-जागती  इच्छायों के अंजाम की
और अनंत अपेक्षायों के परिणाम की
अब भी तलाश कुछ बाकी है ।

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