Saturday, January 3, 2015

काश एक नया नंबर होता....

काश एक नया नंबर होता
कुछ कहता अपनी
कुछ सुनता उनकी
मुलाकातों की बातें होती
और बातों में मुलाकातें होती
बताती तुम दिन का हाल
और पूछती रूटीन सवाल
देर रात तक चलती हाँ-हूँ की कहानी
न होता तुमको होश
और ना रहता मेरे आँखों में पानी
फिर सुबह तुम कॉलेज के लिए फोन पर उठाती
और खुद फिर से सो जाती
यह सब होता
अगर नया नंबर होता

चलो कोई नहीं
अब कॉलेज तो बदल ही लिए है
और फ़ोन भी बहुत चतुरा गए है
तुम ना सही 
तुम्हारी आवाज़ के अलार्म की ही जिंदगी बना लिए है।

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