Sunday, January 3, 2010

सफ़ेद

हर रंग कुछ कहता हैं | उन्ही रंगों में से एक रंग हैं- सफ़ेद | जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से सभी रंगों का मिश्रित रूप कहा जा सकता हैं , जिसमे इन्द्रधनुष के सात रंग होते हैं | इसके अनुसार तो सफ़ेद रंग वह सब कुछ कह सकता हैं जो विभिन्न वर्ण व्यक्त करते हैं |
यदि हम अपने समाज का ही उदाहरण ले तो राजनेतायों की पोशाक से लेकर मृत्युशव का रंग भी सफ़ेद ही होता हैं | यह सत्य हैं की श्वेत वर्ण विभिन्न भावों को व्यक्त करता हैं पर यह तो सर्वथा अनुचित हैं कि सशक्त राजनेताओं की पोशाक के सफ़ेद रंग को सम्मान दिया जाये और एक विधवा को समाज में हेय दृष्टि से देखा जाये |
जिस स्त्री के पति की मृत्यु हो जाती हैं उसका तो सफ़ेद रंग समाज में कलंकित समझा जाता हैं | वह श्वेत वर्ण शने: शने: कालिमा का ग्रास बनता चला जाता हैं | हम कहते हैं कि हम वैज्ञानिक युग में रह रहे हैं पर क्या हम विज्ञान को अपने जीवन में जी रहे हैं | हम उन दो वर्णों को समान बता रहे हैं जो कदाचित पूर्णत:भिन्न - भिन्न हैं , जहाँ एक ओर सफ़ेद सभी रंगों का सार हैं और वही काला रंग हैं रंगों कि अनुपस्थिति का द्योतक |
धन्य हैं भारतीय नारी जो लाल रंग क बाद इस सफ़ेद रंग को पाने जीवन में इतनी सहेजता से स्वीकार कर लेती हैं परंतु क्या यह हमारा सामाजिक दायित्व नहीं बनता हैं कि हम उसे सफ़ेद का सच को जीने दे | मेरे ये विचार प्राचीन भारतीय परंपरा के विरुद्ध नहीं हैं , पर शायद जो परंपरा ही दूषित हो गयी हो उसे आडम्बर समझ के परित्याग करने में ही व्यक्ति और समाज का कल्याण हैं ||

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