अपने चारो ओर उन साथियों कि सफलता से इर्ष्या होने लगी है जिनका किस्मत से चोली दामन का साथ है | न जाने कब मुझे उस अमावसी चाँद के दर्शन होंगे जो किस्मत का रूप धारण किये हुए हैं |हर एक असफलता मेरे आत्मबल को कम करती जा रही है| मेरी परिश्रमं करने कि भावना भी अब मृतप्राय हो चुकी है |
मेरा अंततः उस प्राकृत शक्ति से यही अनुरोध है कि सौभाग्य को जनमानस में ऐसे न बाटे कि कोई मेरी तरह अपना अंतिम श्रम करने को विवश हो जाये ||
No comments:
Post a Comment