Sunday, June 2, 2013

क्यूंकि बदलाव जरूरी है

काश कुछ बदला होता तब ही
वक्त बना था
दस्तूर रहा था
पर कुछ चूक हो गयी हमसे
गोरों के सिंहासन पर
बैठा दिए पुतले काली चमड़ी के
कहने को जनतंत्र  मिला था
फिर क्यों रही जनता गुलाम तभी भी
पांच साल में एक चुनाव
और समय चली मनमर्जी
बीते थे दो दशक अभी तो
जकड लिया कुछ पंजो ने फिर से
आपातकाल की रानी बनकर
 छीन लिए सब अधिकार सभी से
जेल प्रताड़ित ,नसबंदी पीडित
जनमानस में उबाल भरा
नारायण  के निर्देशन पर
संगठित होकर कुशासन से युद्ध लड़ा
यूँ तो परिणाम निकला जन हक़ में
पर वही चूक दोहराई हमने
रानी हट गयी ,राजा आया
पर न बदले हमने नियम खेल के
वही पांच साल में एक चुनाव
और समय वही मनमर्जी
भारत बदला
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार बढ़ा 
और साथ बड़ी टोपी की लूट
India shining की आस दिखाकर
किया कभी 2G  ,कभी CWG
भ्रष्टाचार से होकर त्रस्त
तभी हुआ फिर से हुंकार
आम आदमी का रूप ग्रहण कर
कृष्णा नहीं अर्जुन ने लिया है युद्ध प्रभार
कठिन है डगर
अंधकारमयी है प्रहर
न जाने फिर भी क्यूँ
अंतर में पनपी है एक आशा
बदलेगा आज
बदलेगा कल
इस भारतभूमि के जन जन का
बदलेगा अब तो जीवन सकल ॥

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