कुछ यार बैठे है चौबारों पे
जीते हुए जिंदगी उसके इशारों पे
एक जैसे ही सपने है
और एक जैसी ही आशाएं
एक जैसा है लक्ष्य उनका
और एक जैसी ही समस्याएं
बचपन बीता है उनका पढ़ पढ़ के
और प्रतिस्पर्धा में बीत रही है जवानी
मैडल पाए बक्से भर के
फिर भी अधूरी है जिंदगी की कहानी
रहती है हाथों को हाथों की तालाश
और आँखें ढूढ़ रही है आँखों को
उमड़ते है दिल में जज़्बात
पर कोई नहीं पास सुनाने को
क्यों होता है ऐसा
अक्सर उन विद्वानों के साथ
कहते है जिनको हम क्रीम देश की
करते है जिनकी प्रशंसा अगाथ
केवल एक मस्तिष्क नहीं ये हृदय भी है
जो रखते है प्रेम की आस
सब सरिता झरनों से बस एक है बिनती
करो अब इनकी दूर ये प्यास ।।
जीते हुए जिंदगी उसके इशारों पे
एक जैसे ही सपने है
और एक जैसी ही आशाएं
एक जैसा है लक्ष्य उनका
और एक जैसी ही समस्याएं
बचपन बीता है उनका पढ़ पढ़ के
और प्रतिस्पर्धा में बीत रही है जवानी
मैडल पाए बक्से भर के
फिर भी अधूरी है जिंदगी की कहानी
रहती है हाथों को हाथों की तालाश
और आँखें ढूढ़ रही है आँखों को
उमड़ते है दिल में जज़्बात
पर कोई नहीं पास सुनाने को
क्यों होता है ऐसा
अक्सर उन विद्वानों के साथ
कहते है जिनको हम क्रीम देश की
करते है जिनकी प्रशंसा अगाथ
केवल एक मस्तिष्क नहीं ये हृदय भी है
जो रखते है प्रेम की आस
सब सरिता झरनों से बस एक है बिनती
करो अब इनकी दूर ये प्यास ।।
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